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"खनन माफिया का शासन: कानपुर देहात में प्रशासन की मूक सहमति"

खनन माफिया: कानपुर देहात का 'स्वर्णिम भविष्य'?

कानपुर देहात, जो कभी अपनी हरियाली और शांतिपूर्ण माहौल के लिए प्रसिद्ध था, अब एक ऐसे ‘स्वर्णिम भविष्य’ की ओर बढ़ रहा है, जहां खनन माफिया ने अपने साम्राज्य की नींव रख दी है। इन माफियाओं का मानना है कि धरती की सतह पर छिपे खजाने को उजागर करने के लिए किसी भी नियम-कानून की जरूरत नहीं, बस मन में दृढ़ निश्चय होना चाहिए। और यही काम यह माफिया बड़े ही अद्भुत तरीके से कर रहे हैं।



प्रशासन की गहरी साधना

अब बात करते हैं हमारे जिम्मेदार प्रशासन की। लगता है, इन अधिकारियों ने कागजों पर कुछ नियम पढ़े ही नहीं या फिर वे किसी गहरी साधना में लीन हैं, जिसे तोड़ना उनके लिए संभव नहीं। माफिया खुलेआम खनन कर रहे हैं, और प्रशासन ने इसे 'छोटे-मोटे कामों' की सूची में डाल रखा है। इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता कि खनन माफिया दिन-ब-दिन नियमों का मजाक बना रहे हैं। शायद प्रशासन के लिए यह 'मौन साधना' का समय है, जो माफिया के अवैध कामकाज को चुपचाप देख रहा है।

नंबर प्लेट नहीं? कोई बात नहीं, माफिया का काम चलता है

कानपुर देहात में अवैध खनन के लिए ट्रैक्टर और डंपरों की कोई कमी नहीं है, लेकिन मजे की बात यह है कि इन वाहनों में से किसी में भी नंबर प्लेट नहीं है। ना ही इनका रजिस्ट्रेशन है, और ना ही इनकी ट्रालियां मानकों के अनुरूप हैं। ये वाहनों को कृषि कार्य के लिए डिजाइन किया गया था, लेकिन अब इनका इस्तेमाल खनन के लिए हो रहा है। नाबालिग बच्चों से ट्रैक्टर चलवाना तो जैसे इन माफियाओं का नया शगल बन चुका है। वाह! क्या गजब की नज़ाकत है अवैध खनन में।

खनन माफिया ने न केवल सरकारी खजाने को चूना लगाया है, बल्कि पर्यावरण का भी बेधड़क शोषण किया है। भोगनीपुर, अकबरपुर, डेरापुर और रसूलाबाद जैसे इलाकों में अवैध खनन का कारोबार जिस रफ्तार से बढ़ रहा है, उसे देख लगता है कि कोई बड़ी प्राकृतिक आपदा आ रही हो। और क्या बात है! प्रशासन की तरह-तरह की 'नज़रअंदाज' करने की कला भी अब इसे देखने के लिए बेजोड़ बन गई है।

कानपुर प्रशासन का 'सपना'

शासन और प्रशासन के लोग शायद खनन माफियाओं के सामने सिर झुका कर उनका आशीर्वाद ले रहे हैं, ताकि उन्हें अपने कानों में रेत भरने का मौका न मिले। कब जागेंगे ये अधिकारी? क्या वे किसी चमत्कारी घटना का इंतजार कर रहे हैं या फिर अपने 'मौन प्रेम' में ही खो चुके हैं? कानपुर देहात का खनन माफियाओं द्वारा शोषण का ये नज़ारा अब 'नया सामान्य' बन चुका है।

बड़ी जल्दी में नजर आ रही है कानपुर देहात में 'खनन माफिया दिवस' मनाने की तैयारी। माफिया धड़ल्ले से खनन कर रहे हैं और प्रशासन इसे बड़े आराम से देख रहा है। अगर यही हाल रहा तो जल्द ही 'खनन माफिया गिल्ड' की एक शाखा कानपुर देहात में खुलेगी, जहां नागरिकता लेने के लिए बस 'इसी काम में हाथ आजमाने' की शर्त रखी जाएगी।

कानपुर देहात को बचाने के लिए प्रशासन और जनता दोनों को जागरूक होना पड़ेगा। वरना, यह खनन माफिया ही जल्द यहां के 'राजा' बन जाएंगे, और हमें अपनी ज़मीन को एक गहरे खड्डे में तब्दील होते देखना पड़ेगा। तब शायद प्रशासन को यह समझ आए कि 'मौन साधना' का कोई फायदा नहीं होता, जब धरती का सीना छलनी हो रहा हो।


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