जर्जर तारों की लापरवाही ने ली गरीबों की रोजी-रोटी: विद्युत विभाग कब जागेगा?
मंगलपुर, जगदीशपुर: मंगलपुर थाना क्षेत्र के जगदीशपुर गांव में एक बार फिर बिजली विभाग की लापरवाही का खामियाजा गरीब ग्रामीणों को भुगतना पड़ा। गांव में जर्जर तारों में शॉर्ट सर्किट होने से भीषण आग लग गई, जिससे चार झोपड़ियां पूरी तरह जलकर राख हो गईं। इस घटना में ग्रामीणों की वर्षों की मेहनत से जमा किया गया अनाज, घरेलू सामान और नकदी सबकुछ जलकर खाक हो गया।
इस हादसे ने एक बार फिर विद्युत विभाग की उदासीनता और सरकारी लापरवाही को उजागर कर दिया है। हर साल शॉर्ट सर्किट से गांवों में आग लगती है, गरीबों की मेहनत स्वाहा हो जाती है, लेकिन कोई भी जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं देता। सवाल यह है कि आखिर कब तक गरीब अपनी मेहनत की कमाई को इस सरकारी लापरवाही की भेंट चढ़ते देखता रहेगा?
कैसे लगी आग?
गांव के निवासी प्रहलाद अपनी पत्नी और बच्चों के साथ खेत में गेहूं की कटाई कर रहे थे। तभी उनके घर के पास लगे बिजली के तारों में अचानक शॉर्ट सर्किट हुआ और एक चिंगारी उनकी झोपड़ी पर गिर गई। देखते ही देखते झोपड़ी आग की लपटों से घिर गई। हवा तेज होने के कारण आग तेजी से फैली और आसपास की झोपड़ियों तक पहुंच गई।
कुछ ही मिनटों में पड़ोस के बीरु, छबिनाथ और भूरा की झोपड़ियां भी जलने लगीं। जब तक ग्रामीण कुछ समझ पाते, तब तक आग विकराल रूप ले चुकी थी। खेतों में काम कर रहे ग्रामीणों ने आग की लपटें देखीं और तुरंत मौके पर पहुंचे। सभी ने मिलकर नलों और ट्यूबवेल से पानी लाकर आग बुझाने की कोशिश की। लेकिन जब तक फायर ब्रिगेड की टीम पहुंची, तब तक सबकुछ जलकर राख हो चुका था।
हजारों रुपये का नुकसान, कोई मुआवजा नहीं!
इस हादसे में चारों परिवारों का भारी नुकसान हुआ।
- बीरु का पांच कुंतल गेहूं, दो कुंतल अन्य अनाज और करीब एक लाख रुपये का घरेलू सामान जलकर राख हो गया।
- छबिनाथ, प्रहलाद और भूरा को भी करीब बीस-बीस हजार रुपये का नुकसान हुआ।
- झोपड़ियों के जलने से रहने के लिए कोई छत नहीं बची और नकदी भी जल गई।
लेखपाल ने मौके पर पहुंचकर नुकसान का आकलन किया और रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेज दी। लेकिन हकीकत यही है कि ऐसी रिपोर्टें सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाती हैं। गरीबों को न कोई मदद मिलती है, न कोई राहत।
विद्युत विभाग की लापरवाही: कब तक जलती रहेंगी गरीबों की झोपड़ियां?
गांवों में जर्जर बिजली के तारों का यह हाल कोई नया नहीं है। हर साल शॉर्ट सर्किट से कई गांवों में फसलें जलती हैं, घर जलते हैं और गरीबों की मेहनत राख हो जाती है। लेकिन विद्युत विभाग के अधिकारी कानों में रूई डालकर बैठे रहते हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि हर महीने हजारों रुपये का बिजली बिल वसूलने वाला विभाग आखिर इन तारों को बदलवाने में इतनी लापरवाही क्यों करता है?
गांवों में अब भी कई जगह ढीले और जर्जर तार लटकते देखे जा सकते हैं। कुछ खंभे तो इतने पुराने हो चुके हैं कि जरा-सी हवा से झुक जाते हैं। लेकिन जब तक कोई बड़ी दुर्घटना नहीं होती, तब तक कोई कार्रवाई नहीं होती।
यह लापरवाही सिर्फ गरीबों के घर जलाने तक ही सीमित नहीं है। कई बार खेतों में भी आग लग जाती है, जिससे किसानों की सालभर की मेहनत बर्बाद हो जाती है। हर साल हजारों बीघा फसल इसी तरह जलकर खाक हो जाती है, लेकिन कोई भी जिम्मेदार अधिकारी इसकी सुध लेने को तैयार नहीं।
प्रशासन की नींद कब टूटेगी?
यह पहली बार नहीं है जब किसी गांव में जर्जर तारों की वजह से आग लगी हो। हर साल इस तरह की घटनाएं होती हैं, लेकिन सरकार और प्रशासन सिर्फ रिपोर्ट तैयार कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं।
जरूरी सवाल यह है कि –
- क्यों नहीं समय-समय पर बिजली के तारों की जांच की जाती?
- क्यों नहीं गांवों में पुराने और ढीले पड़े तारों को बदला जाता?
- जब हर महीने बिजली का बिल लिया जाता है, तो सुधार कार्यों में इतनी लापरवाही क्यों?
क्या सरकार और विद्युत विभाग तब तक इंतजार करेंगे जब तक कोई बड़ी जनहानि नहीं हो जाती?
सरकार से मांग: दोषियों पर हो कार्रवाई, पीड़ितों को मिले मुआवजा
इस घटना के बाद गांव में गुस्सा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि –
- पीड़ित परिवारों को तत्काल मुआवजा दिया जाए।
- गांव में पुराने और जर्जर तारों को तुरंत बदला जाए।
- लापरवाह विद्युत अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
अगर सरकार और प्रशासन ने जल्द कदम नहीं उठाए, तो ऐसे हादसे बार-बार होते रहेंगे और गरीबों की मेहनत यूं ही राख होती रहेगी। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस बार भी सिर्फ रिपोर्ट तैयार होगी या सरकार व विद्युत विभाग कुछ ठोस कदम उठाएंगे।
क्या प्रशासन अब भी सोता रहेगा, या इस बार कोई ठोस कार्रवाई होगी?
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