कानपुर में तीन दर्दनाक घटनाओं ने झकझोरा: अपमान, तनाव और विवाद ने ली तीन जिंदगियां, परिवारों में पसरा मातम
कानपुर। मंगलवार और बुधवार का दिन शहर के लिए बेहद दुखद साबित हुआ। तीन अलग-अलग घटनाओं ने तीन परिवारों को गहरे शोक में डुबो दिया। अपमान, तनाव और घरेलू कलह ने तीन जिंदगियों को लील लिया। इन घटनाओं ने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर हम इतने असंवेदनशील क्यों होते जा रहे हैं, कि अपनों का दर्द न देख पाते हैं, न समझ पाते हैं।
पहली घटना: ससुराल में अपमान ने ली युवक की जान
जाजमऊ निवासी गोपीचंद्र का 28 वर्षीय पुत्र विशाल टेनरी में मजदूरी करता था। विशाल की पहली पत्नी ममता की मौत के बाद उसके ऊपर छोटी बेटी वैष्णवी की जिम्मेदारी आ गई थी। बेटी की देखभाल और पालन-पोषण के लिए उसने गोंडा निवासी महिला से दूसरी शादी कर ली। मंगलवार को उसे खबर मिली कि उसकी पहली पत्नी के पिता यानी उसके ससुर का देहांत हो गया है। यह सुनते ही विशाल मसवानपुर स्थित ससुराल पहुंचा।
वहां उसे उम्मीद थी कि दुख की इस घड़ी में वह भी परिवार का हिस्सा माना जाएगा, लेकिन ससुराल वालों ने उसे अपमानित कर दिया। उसके बहनोई और अन्य परिजनों ने न केवल उसे ताने मारे बल्कि ममता की मौत का दोषी भी ठहरा दिया। उसे अपशब्द कहे गए और वहां से भगा दिया गया।
अपमानित होकर विशाल आक्रोश और गहरे दुख में वहां से निकल पड़ा। घर पहुंचने से पहले उसकी मां सुनीता ने उसे फोन किया तो उन्होंने फोन पर विशाल के चिल्लाने की आवाजें सुनीं। मां ने बेटे को घर आने को कहा, मगर विशाल का मन टूट चुका था। वह सीधे गुरुदेव क्रासिंग पहुंचा और चलती ट्रेन के आगे छलांग लगा दी। मौके पर ही उसकी दर्दनाक मौत हो गई।
पुलिस को सूचना मिलने पर शव को कब्जे में लिया गया और परिजनों को खबर दी गई। घर में कोहराम मच गया। मां सुनीता ने ससुराल वालों पर बेटे को अपमानित करने और उसकी मौत का जिम्मेदार ठहराया है। रावतपुर थाना प्रभारी के.के. मिश्रा ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और परिजनों के बयान दर्ज किए गए हैं।
दूसरी घटना: परीक्षा में असफलता के डर से छात्रा ने जान दी
बर्रा 2 निवासी विनोद पाल की 17 वर्षीय बेटी आंचल पाल इंटर की छात्रा थी। वह पढ़ाई में अच्छी थी, लेकिन इस बार इंटरमीडिएट के पेपर कठिन आने के कारण वह तनाव में रहने लगी थी। पिता विनोद पाल ने बताया कि बेटी के व्यवहार में अचानक बदलाव आ गया था। जब उससे पूछा गया तो उसने बताया कि पेपर में बहुत कुछ सिलेबस से बाहर आया था और पेपर खराब हो गए हैं।
मां रतना पाल और पिता दोनों उसे लगातार समझा रहे थे कि इसमें डरने की बात नहीं है, अगली बार और अच्छा करेगी। मंगलवार को वह अपनी मां के साथ कोचिंग गई और पूरी रात पढ़ाई भी की। लेकिन उसके मन में गहरा डर और निराशा बैठ गई थी। देर रात करीब तीन बजे उसने अपने कमरे में दुपट्टे का फंदा बनाकर आत्महत्या कर ली।
सुबह जब वह कमरे से बाहर नहीं आई तो मां उसे जगाने गई। वहां बेटी को फांसी के फंदे पर लटका देख उनकी चीख निकल गई। पूरा परिवार बदहवास हो गया। आसपास के लोग जुट गए। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच की, लेकिन परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से मना कर दिया। पुलिस ने सिर्फ कागजी कार्रवाई कर शव परिजनों को सौंप दिया।
तीसरी घटना: पत्नी से विवाद के बाद युवक ने की आत्महत्या
बिधनू थाना क्षेत्र के हाजीपुर गांव में रहने वाले ओमप्रकाश का 19 वर्षीय बेटा सुरजीत मजदूरी करता था। छह महीने पहले ही उसकी शादी बर्रा गांव की तान्या से हुई थी। शादी के बाद सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन मंगलवार शाम काम से लौटने पर पति-पत्नी में किसी बात को लेकर विवाद हो गया।
झगड़ा इतना बढ़ गया कि सुरजीत ने खुद को कमरे में बंद कर लिया। काफी देर बाद भी जब वह बाहर नहीं निकला तो परिजन दरवाजा तोड़कर अंदर गए। वहां सुरजीत का शव साड़ी के फंदे से छत में पड़ी बल्ली से लटका हुआ मिला। यह देख परिवार के होश उड़ गए।
सूचना मिलते ही बिधनू इंस्पेक्टर जितेंद्र प्रताप सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। परिजनों से पूछताछ की, लेकिन परिवार ने पोस्टमार्टम कराने से साफ इनकार कर दिया। पुलिस ने कागजी कार्रवाई के बाद शव परिजनों को सौंप दिया।
एक ही दिन में तीन आत्महत्याएं, समाज के लिए बड़ा संदेश
इन तीन घटनाओं ने शहर को हिलाकर रख दिया है। अपमान, तनाव और झगड़े की वजह से तीन लोगों ने अपने प्राण गंवा दिए और तीन परिवार उजड़ गए। यह घटनाएं बताती हैं कि हम समाज में एक-दूसरे को कितना कम समझने लगे हैं। रिश्तों में सहनशक्ति की कमी, मानसिक दबाव और संवादहीनता ऐसी त्रासदी की बड़ी वजह बन रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते अपनों के मन की बात सुनना, समझना और उनका मनोबल बढ़ाना बहुत जरूरी है। छोटी-छोटी बातें जब दिल में रह जाती हैं, तो वे बड़ी परेशानी का रूप ले लेती हैं। इसलिए परिवार और समाज को संवेदनशील होना चाहिए और मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करनी चाहिए।
पुलिस जांच और अपील
रावतपुर और बिधनू थाना पुलिस ने बताया कि सभी मामलों की जांच जारी है। यदि कोई शिकायत आती है, तो कार्रवाई की जाएगी। साथ ही पुलिस ने समाज से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति पर मानसिक दबाव न डालें, और यदि किसी को परेशानी में देखें तो मदद करें, ताकि इस तरह की दुखद घटनाएं रोकी जा सकें।
इन तीनों घटनाओं ने एक बार फिर यह साबित किया है कि जीवन में सबसे जरूरी है सहानुभूति, समझदारी और समय रहते बात करना। एक गलत शब्द, एक तिरस्कार भरी नजर या थोड़ी सी उपेक्षा भी किसी की जान ले सकती है। समाज को आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं से सीख लेकर एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील बनना चाहिए। जीवन अनमोल है — इसे टूटने से बचाने की जिम्मेदारी हम सबकी है।
0 टिप्पणियाँ