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कानपुर देहात: प्राइवेट अस्पताल की लापरवाही से मरीज की मौत, स्वास्थ्य विभाग बना मूकदर्शक

कानपुर देहात: प्राइवेट अस्पताल की लापरवाही से मरीज की मौत, स्वास्थ्य विभाग बना मूकदर्शक


परिजनों का आरोप— गलत इंजेक्शन लगाने से हुई मौत, पुलिस ने बिना अनुमति जल्दबाजी में कराया पोस्टमार्टम

कानपुर देहात के रनियां थाना क्षेत्र स्थित राजावत हॉस्पिटल में एक मरीज की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतक श्रवण नाम का शख्स सिरदर्द और शरीर में दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचा था, लेकिन इलाज के नाम पर डॉक्टर ने उसे दो इंजेक्शन लगा दिए, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी और कुछ ही मिनटों में उसकी मौत हो गई।

मृतक फाइल फोटो 


इस घटना के बाद मृतक के परिजन और स्थानीय लोग गुस्से में आ गए। उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया। मौके पर पुलिस बल तैनात कर स्थिति को संभाला गया, लेकिन सवाल यह उठता है कि लगातार हो रही ऐसी घटनाओं पर स्वास्थ्य विभाग आखिर कब जागेगा?

प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के नाम पर खिलवाड़

यह पहली बार नहीं है जब किसी प्राइवेट अस्पताल की लापरवाही से मरीज की जान गई हो। 24 घंटे पहले ही रूरा थाना क्षेत्र के साईं नाथम अस्पताल में भी गलत इलाज से एक मरीज की मौत हो चुकी थी। 36 घंटे के भीतर दो मरीजों की गलत इलाज के चलते मौत ने स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत उजागर कर दी है।

राजावत हॉस्पिटल की इस घटना में भी डॉक्टरों ने मरीज की बीमारी का सही कारण जाने बिना ही इंजेक्शन लगा दिया, जिससे उसकी जान चली गई। यही नहीं, परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने बिना उनकी अनुमति के जल्दबाजी में पोस्टमार्टम करवा दिया और महज एक घंटे में रिपोर्ट भी तैयार कर दी।

स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था और उदासीनता

कानपुर देहात समेत पूरे उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति दयनीय है। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और दवाओं की कमी के कारण मजबूर होकर लोग प्राइवेट अस्पतालों का रुख करते हैं, लेकिन यहां भी उनके साथ धोखा हो रहा है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की लापरवाही और मिलीभगत का नतीजा है कि बिना किसी योग्यता और मान्यता के कई झोलाछाप डॉक्टर और लापरवाह चिकित्सक अस्पताल चला रहे हैं। इन अस्पतालों में मरीजों का सही इलाज करने की बजाय सिर्फ पैसे कमाने पर ध्यान दिया जाता है, और लापरवाही के कारण आए दिन मरीजों की जान चली जाती है।

क्यों नहीं होती कार्रवाई?

हर बार जब इस तरह की घटनाएं होती हैं, तब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचकर जांच के आदेश दे देते हैं, लेकिन उसके बाद कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। प्राइवेट अस्पतालों पर कोई सख्त निगरानी नहीं रखी जाती, जिसके कारण ये अस्पताल बेखौफ होकर मनमाने तरीके से इलाज करते रहते हैं।

मरीजों के परिजन अस्पतालों की लापरवाही की शिकायत लेकर स्वास्थ्य विभाग के दफ्तरों के चक्कर काटते रहते हैं, लेकिन न तो किसी की लाइसेंस रद्द होती है और न ही किसी पर कोई ठोस कार्रवाई होती है।

मृतक के परिजनों की मांग— दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई

श्रवण के परिजनों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि अस्पताल के डॉक्टरों पर सख्त कार्रवाई की जाए और अस्पताल का लाइसेंस रद्द किया जाए। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग पर भी सवाल उठाए हैं कि आखिर कैसे बिना किसी निगरानी के ऐसे अस्पताल चल रहे हैं?

स्थानीय लोगों का भी कहना है कि अगर स्वास्थ्य विभाग इसी तरह लापरवाह बना रहा, तो आने वाले समय में और भी कई निर्दोष मरीजों की जान जा सकती है।


प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि:

प्राइवेट अस्पतालों की सख्त जांच हो और लापरवाह अस्पतालों के लाइसेंस रद्द किए जाएं।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो।

प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के मानकों को सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसी भी मरीज की जान लापरवाही से न जाए।


सरकार कब लेगी एक्शन?

अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है। क्या इस बार दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?


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